नदी जोड़ो परियोजना : भविष्य के लिए आपदा
किसी नदी का एक प्राकृतिक प्रवाह होता है, एवं वह उसका कई वर्षों से अनुसरण कर रही होती है |नदी का अपना एक तंत्र होता है जो मात्र उसके प्राकृतिक प्रवाह के लिए अनुकूलित होता है| हम कैसे नदियों को आपस में जोड़कर वर्षा जल संग्रहण ,बाढ़ नियंत्रण जैसी समस्याओं पर नियंत्रण कर सकते हैं | यदि नदियों एवं नहरों को आपस में जोड़ा गया तो इससे पूरा नदी तंत्र हिल जायेगा और पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में पढ़ जायेगा |इससे जलीय जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ेगा, उनके भोजन का विस्थापन हो जायेगा एवं उन पर निर्भर रहने वाला मानव जीवन खतरे में पढ़ जायेगा |आज हमें इसके सकारात्मक पक्ष दिख रहे हैं परन्तु भविष्य में हमें पश्चाताप से ही संतुष्ठ होना पढ़ेगा | एक नदी तंत्र की विशेषताएं अन्य नदी तंत्र के सामान नहीं होती हैं जब इनको आपस में जोड़ेंगे तो इसका परिणाम भयावह होगा जिसकी कल्पना आज ही कर लें तो अच्छा रहेगा | ग्लेशियर से उद्गमित होने वाली नदियों में वर्ष भर प्रवाह रहता है एवं प्रायद्वीपीय तथा पठारी नदियां वर्ष की एक लम्बी अवधी तक सुखी रहतीं हैं | अब यदि इन नदियों से नहरों को जोड़ दें तो क्या सूखा वाली अवधी ...